मारवाड़ी लघु हास्य कथा - टार्जन री काकी
लेखक - अशोक व्यास
पचे कई हुयो सा?
वे मने पूछ रिया हा
कई केवतो
की कोई हुयो
मजो कोनी आवतो
मैं कोणी बना दी
मैं केयो
"गाड़ी में ब्रेक कोई लागियो और घाटियों माते
तेज़ रफ़्तार ऊँ नीचे आवने लगी'
'मैं ब्रेक दबा रियो हो
पर गाड़ी रुक कोई रेई ही
मैं घबरा गियो
आज तो गया'
अबे हेंग जणा म्हारी बात ध्यान ऊ हुण रिया हा
पचे कई हुयो सा
'गाड़ी तो ठीक है ' म्हारो पक्को दोस्त पूछियो
क्योंकि मैं प्रशांत री गाड़ी लेने इज गया हो'
वो तो मजाक में पूछ लियो
बाकी जणा उन लारे पड़ गया'
'थने गाड़ी री चिंता है, दोस्त री फिक्र कोनी"
अबे हेंग जणा मने तो भूल गिया
प्रशांत केयो 'अरे मजाक कोई हमझो कई'
मजाक रो भी कोइ टेम हुए, मुकुल सा उन हमझावने लागिया
शैला जी चाय ले ने आया
ट्रे टेबल माते रखता बोलिया
'मजाक रे वास्ते भी कोइ पंडित जी ने पूछ ने मुहूर्त निकालना पडी कई'
गोविन्द जी पूछ्यो 'आप भी तो हाथे ईज हानी, गाड़ी में ब्रेक कोई लागियो जरे '
'किसी गाड़ी?'
प्रशांत री, माउंट आबू जाने आवता जरे
कुण गयो
'आप दोई गया हा नी'
'गया कोनी, जावता हा'
'पच्चे कई हुयो'
'ऐ बैठ गया , फेसबुक ले ने, केवे की 'ऑनलाइन राजस्थानी' रे वास्ते
एक कोणी लिखनी है'
"महोने तो खूब देर ऊँ, बिना लिखियों कोणी बणा बणा ने हुणा रिया है '
लक्ष्मण बोलियों, 'आपरी कोणी रो क्लाइमेक्स कई रेयो, गाड़ी भिड़ी के नहीं ?"
मैं केयो 'भिड़ती भिड़ती बच गी, टार्जन री काकी चाय ले ने आ गी"
शैला जी म्हणे देखता देखता
आँखियों ऊँ बोलिया 'करे गप्पों धरनी बंद करोला'
मैं उठ ने गुलदस्ते मू गुलाब रो फूल उठायो,
शैला जी ने देवणो नाटक करतो करतो केयो
"संसार गप्प ही है,
कुछ आप री, कुछ म्हारी
गप्पों धरण वाला इ ज इन संसार ने चला रिया है'
कुछ समझिया?
"बिलकुल' वे होंकरो भरियो
"कई"? मैं पूछ्यो तो जवाब मिलियो
"हमझी तो की नहीं, मैं तो गप्प मार रही ही'
टिमी भईसा कोणी माते 'दी एन्ड' रो बोर्ड लगावता बोलिया
"टार्जन री काकी गप्प लगावे जरे अच्छा अच्छा लोगो री कोणीयों
पूरी हूँ जावे'
लक्ष्मण जी आपरी तरफ ऊँ पूंछ जोड़ी,
'अगर टार्जन री काकी टेम माते नहीं आवती, तो शर्तिया एक्सीडेंट हु जावतो'
लेखक - अशोक व्यास
पचे कई हुयो सा?
वे मने पूछ रिया हा
कई केवतो
की कोई हुयो
मजो कोनी आवतो
मैं कोणी बना दी
मैं केयो
"गाड़ी में ब्रेक कोई लागियो और घाटियों माते
तेज़ रफ़्तार ऊँ नीचे आवने लगी'
'मैं ब्रेक दबा रियो हो
पर गाड़ी रुक कोई रेई ही
मैं घबरा गियो
आज तो गया'
अबे हेंग जणा म्हारी बात ध्यान ऊ हुण रिया हा
पचे कई हुयो सा
'गाड़ी तो ठीक है ' म्हारो पक्को दोस्त पूछियो
क्योंकि मैं प्रशांत री गाड़ी लेने इज गया हो'
वो तो मजाक में पूछ लियो
बाकी जणा उन लारे पड़ गया'
'थने गाड़ी री चिंता है, दोस्त री फिक्र कोनी"
अबे हेंग जणा मने तो भूल गिया
प्रशांत केयो 'अरे मजाक कोई हमझो कई'
मजाक रो भी कोइ टेम हुए, मुकुल सा उन हमझावने लागिया
शैला जी चाय ले ने आया
ट्रे टेबल माते रखता बोलिया
'मजाक रे वास्ते भी कोइ पंडित जी ने पूछ ने मुहूर्त निकालना पडी कई'
गोविन्द जी पूछ्यो 'आप भी तो हाथे ईज हानी, गाड़ी में ब्रेक कोई लागियो जरे '
'किसी गाड़ी?'
प्रशांत री, माउंट आबू जाने आवता जरे
कुण गयो
'आप दोई गया हा नी'
'गया कोनी, जावता हा'
'पच्चे कई हुयो'
'ऐ बैठ गया , फेसबुक ले ने, केवे की 'ऑनलाइन राजस्थानी' रे वास्ते
एक कोणी लिखनी है'
"महोने तो खूब देर ऊँ, बिना लिखियों कोणी बणा बणा ने हुणा रिया है '
लक्ष्मण बोलियों, 'आपरी कोणी रो क्लाइमेक्स कई रेयो, गाड़ी भिड़ी के नहीं ?"
मैं केयो 'भिड़ती भिड़ती बच गी, टार्जन री काकी चाय ले ने आ गी"
शैला जी म्हणे देखता देखता
आँखियों ऊँ बोलिया 'करे गप्पों धरनी बंद करोला'
मैं उठ ने गुलदस्ते मू गुलाब रो फूल उठायो,
शैला जी ने देवणो नाटक करतो करतो केयो
"संसार गप्प ही है,
कुछ आप री, कुछ म्हारी
गप्पों धरण वाला इ ज इन संसार ने चला रिया है'
कुछ समझिया?
"बिलकुल' वे होंकरो भरियो
"कई"? मैं पूछ्यो तो जवाब मिलियो
"हमझी तो की नहीं, मैं तो गप्प मार रही ही'
टिमी भईसा कोणी माते 'दी एन्ड' रो बोर्ड लगावता बोलिया
"टार्जन री काकी गप्प लगावे जरे अच्छा अच्छा लोगो री कोणीयों
पूरी हूँ जावे'
लक्ष्मण जी आपरी तरफ ऊँ पूंछ जोड़ी,
'अगर टार्जन री काकी टेम माते नहीं आवती, तो शर्तिया एक्सीडेंट हु जावतो'
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