देखा साई ने
टटोल कर
टूट-फूट के लिए
मुखरित होने का माध्यम
मुझे बनाने से पहले
कर दिया पक्का
करूणामय नैनों से छूकर
"तू चुप रहेगा
तभी मैं बोलूंगा
चुप होते ही
मिल गई शांति
शांत आनंद पूछ बैठा
"कब बोलोगे साईं ?"
साईं बोले
"तू अभी तक बोलता है
बोल मत
सौंप कर तन-मन मुझे
सुन
सिर्फ सुन
बोल फूटेंगे अपने आप
मेरे स्पंदन से
तुझमें,
जब भी
जो भी
देख उन्हें
सुन अपने आपको
ऐसे की जैसे
सुन रहा हो मुझे
जय श्री कृष्णा
मार्च ११, २००४, साईं मंदिर, न्यूयार्क
"आग्रह छोड़"
कहा साईं ने
आग्रह
छल है प्राप्ति का
मुक्ति निरागृह में है
आकाश का टुकड़ा
मत मांग
तेरा ही है पूरा आकाश
साईं चिकित्सक है
चीर कर ग्रन्थियां
स्वस्थ करता है
बुलाया साईं ने "ला हाथ पकड़ मेरा
चलते-चलते हाथ पकड़ कर साईं का
किस क्षण
चलना उड़ना हुआ
पता ही न चला
उड़ते उड़ते
चुपचाप जब
पूछा साईं ने
"कहाँ जाना है"
मन बोला "कृष्ण दरस को द्वारका"
हंस कर कहा साईं ने
"कृष्ण तुम्हारी चेतना है ,
मन को द्वारका बनाओ
कृष्ण को पाओ
और हाँ
अगर अपना मन
तुम मेरे पास लाओगे तो
तुम्हारे मन को
द्वारिका मैं बनाऊंगा
आश्वस्त रहो"
जय श्री कृष्ण
अशोक व्यास

